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राजनीति विज्ञान विभाग में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ

दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ’सशक्त नारी सशक्त समाज’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभाग के सहायक आचार्य श्री इंद्रेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि जब हम जैविक रूप से समान हैं तो असमानता हमारे समाज में क्यों है। आज हम स्वीकार कर चुके हैं कि आधी आबादी को हाशिए पर रखकर समग्र विकास नहीं कर सकते। महिलाओं को निर्णय का अधिकार मिलना चाहिए ताकि वह विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दे सकें। आज यह एक सशक्त समाज के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है ।


राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि हमारे समाज में महिलाओं को देवी के रूप में स्थान प्रदान किया गया है। मध्य काल के बाद महिलाओं की स्थिति का पराभव हुआ किंतु आज सरकारी प्रयास द्वारा नारी के स्वतंत्रता सुरक्षा और स्वावलंबन हेतु विभिन्न योजनाओं तथा कानूनों का निर्माण किया गया है, जिससे महिलाएं पहले की अपेक्षा अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं। लेकिन फिर भी पुरुषवादी सोच उनको निर्णय में हिस्सेदारी प्रदान नहीं करती। आज जरूरत है महिलाओं को शिक्षित करने की जिससे वे अपने अधिकारों को समझते हुए सामाजिक कुरीतियों का विरोध करने के लिए मुखर हो सके, तभी समाजिक विकास संभव है। क्योंकि एक शिक्षित मां एक पूर्ण परिवार को शिक्षित करती है और एक शिक्षित परिवार शिक्षित समाज का निर्माण करता है।


उक्त अवसर पर शोध छात्रा रचना कुशवाहा ने कहा कि जब तक स्त्रियों का सामाजिक उत्थान नहीं होगा तब तक महिला सशक्तिकरण के संबंध में कार्यक्रम का आयोजन केवल ढोल पीटना होगा। यदि सही मायने में महिलाओं को सशक्त बनाना है, तो महिलाओं के प्रति अपने सोच में परिवर्तन लाना होगा तथा उनके प्रति सकारात्मक रवैया अपनाना होगा।
इसके साथ ही विभाग के शोध छात्र राधेश्याम, धीरज रस्तोगी, अर्चना तिवारी अंजली सिंह तथा रामकेश ने भी अपने अपने विचार रखे।


अंत में राजनीति विज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ वीणा गोपाल मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सदियों पहले अफ्रीका में नारी सशक्तिकरण के बीज दिखाई देते हैं, जहां अफ्रीकी महिलाओं ने अपने संदेश में कहा था कि मेरी बस एक ही गुजारिश है तुम मुझे पैसा मत दो, बेशक उसकी मुझे जरूरत है। मुझे अच्छा खाना भी मत दो, बेशक उसकी मुझे जरूरत है। बस मेरी एक ही गुजारिश है, तुम मेरा रास्ता मत रोको और यह बात आज के सामाजिक परिवेश में हमें समझने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि आज महिलाओं के समान कार्य समान वेतन, वोट के अधिकार, शिक्षा का अधिकार, आर्थिक अधिकार आदि हमें प्राप्त हो चुके हैं। देखा जाए तो एक महिला के गर्भ से लेकर मृत्यु तक सभी अधिकार कानूनी रूप से आच्छादित हैं और हमारे अधिकार सुरक्षित हैं। लेकिन आज भी मिशन शक्ति जैसा अभियान चलाना पड़ रहा है तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि आज भी सामाजिक सोच में दुराग्रह है और इसके मूल में रूढ़िवादी एवं पुरातन वादी सोच है।
कार्यक्रम का संचालन विभाग की छात्रा कीर्ति द्विवेदी ने आभार ज्ञापन डॉ अखिल कुमार श्रीवास्तव ने की। उक्त अवसर पर श्री श्याम सिंह, डाॅ. प्रियंका सिंह, डॉ अखण्ड प्रताप सिंह सहित विभाग के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 8-03-2021 गोरखपुर

By Ratnavali Verma

Executive Editor

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