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बसंत पंचमी के पावन अवसर पर दिग्विजय नाथ पी जी कॉलेज गोरखपुर में बी.एससी. गणित एवं बी.एड. के छात्र/छात्राओं द्वारा दोनों परिसरों में बसन्त पंचमी पूजन व महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में विज्ञान गणित वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा वोकल फॉर लोकल विषय पर संगोष्ठी व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की पहली कड़ी में विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गयी, जिसमे विज्ञान तृतीय वर्ष की छात्रा वत्सला शाही ने सरस्वती वंदना पर नृत्य प्रस्तुति, तृतीय वर्ष के छात्र निमेष ने अपनी टीम के साथ सामूहिक नृत्य, विज्ञान प्रथम वर्ष के छात्र गंगेश्वर यादव ने राष्ट्र-भक्ति गीत ए वतन पर नाटय प्रस्तुति दी, इसके साथ ही प्रथम वर्ष के छात्र राघवेंद्र शर्मा और तृतीय वर्ष के छात्र सत्यम सिंह ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविता प्रस्तुत की।छात्र-छात्राओं ने गीत, नृत्य, सामुहिक गीत व नृत्य, भाषण आदि विधा में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी, जिसने सभी का मन मोह लिया। इसके उपरांत विद्यार्थियों ने प्राचार्य एवं उपस्थित सभी शिक्षकों को श्रीमद्भागवत गीता भेंट कर सम्मानित किया व उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया।

कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में मुख्य वक्ता डॉ संजय कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, प्राकृतिक चिकित्सा, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, प्रयागराज ने वोकल फॉर लोकल विषय पर बोलते हुए कहा कि कोरोना जैसी महामारी ने देश और दुनिया के अधिकतर देशों को अपनी चपेट में ले लिया, जिसका प्रभाव इन सभी देशों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति पर भी पड़ा। भारत में इसका प्रभाव अन्य देशों की अपेक्षा बहुत ही कम रहा, ऐसे में हमें भारत की विविधता और सांस्कृतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोविड-19 जैसी महामारी से लड़े और विजयी हुए।

इससे लड़ते हुए लोकल से वोकल होने की बात डॉ संजय सिंह ने कही और बताया कि कोरोना से पहले हम प्राकृतिक चिकित्सा पर विश्वास न करते हुए पाश्चात्य पद्दति की ओर ज्यादा आकर्षित थे। लेकिन कोरोना ने हमें हमारी योग व प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व को समझा दिया। शरीर, मन और आत्मा को नियंत्रित करने में योग मदद करता है। शरीर और मन को शांत करने के लिए यह शारीरिक और मानसिक अनुशासन का एक संतुलन बनाता है।

यह तनाव और चिंता का प्रबंधन करने में भी सहायता करता है। योग, आसन शक्ति, शरीर में लचीलेपन और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए जाना जाता है। इसलिए हमें योग और प्राकृतिक चिकित्सा को प्रचारित करना है। पूरी दुनिया इसे अपना रही है और भारत फिर से अपनी पहचान विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने की ओर अग्रसर है। डॉ परीक्षित सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, वनस्पतिव विज्ञान विभाग ने विद्यार्थियों को इस आयोजन हेतु बधाई दी और इस प्रकार के सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम की सराहना की।

कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया और कहा इस शैक्षिक संस्थान की नींव एक पौधे के रूप में ब्रम्हलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने आज से 50 वर्ष पूर्व रखी थी जो आज एक बड़े वटवृक्ष के रूप में स्थापित है।

आज यहां मैं अपने सामने असाधारण छात्रों को देख रहा हूं और ऐसे युवाओं को में प्रतिवर्ष संबोधित करने में खुशी महसूस करता हूं, आज के युवा, कल के जिम्मेदार नागरिक होंगे। हम व हमारा पूरा समर्पित शिक्षक दल छात्र/छात्राओं द्वारा किये गए इस अद्भुत आयोजन की सराहना करते हैं।

कार्यक्रम का संचालन विज्ञान संकाय तृतीय वर्ष के छात्र अर्पित त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक डॉ सूरज शुक्ला, डॉ कीर्ति जायसवाल, डॉ नितेश शुक्ल ,डॉ अजेय तिवारी, डॉ अनुराधा सिंह सहित विज्ञान संकाय के विद्यार्थी उपस्थित रहें।

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